इंसान को कायदे या वायदे नहीं बस फायदे पसंद है

सांप के दांत और बिच्छू के डंक और इंसान के मन में कितना जहर भरा है यह बताना बहुत मुश्किल है। इन्सान खुद के हजार गुनाहों पर भी पर्दा डालकर कहता है कि, जमाना बड़ा खराब है। असल में, जमाना नहीं इंसान बदल गए है। आज लोगों को कायदे या वायदे नहीं बस अपने फायदे पसंद है।

इंसान को कायदे या वायदे नहीं फायदे पसंद है

आजकल, लोगों पर अच्छी सलाह का प्रभाव इसलिए नहीं पड़ता क्योंकि लेखक और पाठक दोनों समझते हैं कि यह सलाह दूसरों के लिए है।

दुनिया की सबसे सस्ती चीज सलाह होती है, अगर आप एक से सलाह मांगोगे तो हजार दे देते हैं और दुनिया की सबसे महँगी चीज होती है ‘मदद’, आप हजारों से मदद मांगोगे तब जाकर कोई एक आपकी मदद के लिए हाथ उठाएगा।

किसी ने सच ही कहा है कि, जिंदगी की लड़ाई अकेले ही लड़नी पड़ती है, सलाह तो सब देते है पर साथ कोई नहीं देता। वैसे ही जो लोग सब की परवाह करते हैं ऐसे लोगों की परवाह करने वाला कोई नहीं होता है।

विषय-सूची

  • इंसान को बस अपने फायदे पसंद है (Insan)
    • प्यार से रहो, खासकर अपनों के साथ

इंसान को बस अपने फायदे पसंद है (Insan)

आज के जमाने में आप जिन्हें जरूरत से ज्यादा वक्त देते है वही लोग वक्त के साथ बदल जाते है। इसलिए हमेशा याद रखें, केवल समय ही आपका सच्चा मित्र होता है क्योंकि यदि समय आपके साथ है तो सब आपका साथ देते है।

जब वक्त और अपने दोनों साथ छोड़ देते है तब इन्सान बाहर से नहीं अंदर से टूट जाता है वो टूट तो जाता है लेकिन पत्थर बन जाता है।

हम इंसान भी बड़े अजीब होते हैं, जब ऊपर वाले से कुछ मांगते है तो सोचते है, हमारा रब सब देख और सुन रहा है लेकिन जब इन्सान किसी की बुराई करता है या कोई गलत काम करता है तो वह ऊपर वाले को भूल जाता है।

ऐसे ही, दान करते समय इन्सान समझता है कि ईश्वर सब में बसता है लेकिन चोरी करते समय वह यह बात भूल जाता है।

हम खुद की गलती पर अच्छे वकील बन जाते हैं, और दूसरों की गलती पर सीधे जज बन जाते है। लोगों को अपनी गलती भूल लगती है लेकिन वही गलती अगर किसी दुसरे ने की हो तो उसे वो गुनाह लगता है।

जब इंसान को कोई अच्छा इंसान नहीं मिलता है तो वो दुनिया को कोसता है और कहता है कि, इस दुनिया में कोई किसी का नहीं, लेकिन यह नहीं सोचता कि वो खुद किसका हुआ।

जिंदगी का दस्तूर ही कुछ ऐसा है, अगर देती है तो एहसान नहीं करती लेकिन जब लेती है तो बिलकुल भी लिहाज नहीं करती।

अपने ही मोबाइल से जब अपना ही नंबर डायल किया तो आवाज आई, आप जिस व्यक्ति से बात करता चाहते है वो अभी व्यस्त है, तो एहसास हुआ कि, दुनिया औरों से मिलने में मस्त है, इसलिए खुद से मिलने के लिए किसी के पास वक्त ही नहीं है।

दुःख ने सुख से कहा, तुम कितने खुशनसीब हो, हर कोई तुम्हें पाना चाहता है। सुख ने कहा, अरे तुम्हें पाकर लोग अपनों को याद करते हैं, लेकिन मुझे पाकर लोग अपनों को ही भूल जाते है।

किसी को भूलने या किसी को चोट पहुंचाने से पहले याद रखना, मिट्टी का मटका, परिवार और रिश्ते की कीमत बनाने वाला जानता है तोड़ने वाला नहीं।

सुख प्राप्त करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन सुख के चक्कर में अपनों को भूल जाना अच्छाई नहीं बहुत बड़ी गलती है।

इन्सान अपना उस चेहरे को तो खूब सजाता है जिसे लोग देखते है पर उसे अपनी आत्मा को सजाने का ख्याल नहीं आता है जिस पर परमात्मा की नजर होती है।

आपका चित्र नहीं चरित्र सुंदर होना चाहिए, आपका भवन नहीं भावना सुन्दर होनी चाहिए, केवल नजर नहीं देखने का नजरिया सुंदर होना चाहिए।

प्यार से रहो, खासकर अपनों के साथ

सबके साथ प्यार से रहो, ख़ासकर अपनों के साथ, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, रूठना अच्छी बात नहीं है क्योंकि पत्ते वही अच्छे लगते है जो डाल से टुटते नहीं है।

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  • कड़ी मेहनत ही सफल भविष्य की कुंजी है

इन्सान एक ऐसी चीज है जो ना अपने दुःख को बेच सकता है और ना ही अपने सुख को खरीद सकता है। इसलिए दुःख में सब्र करें और सुख में अल्लाह का शुक्र करें।

कौन क्या कर रहा है, क्यों कर रहा है, इस पर ध्यान देने से अच्छा खुद पर ध्यान दें कि, आप क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं तभी आप खुश रहेंगे और अपनी जिंदगी को सफल बना सकते हैं।

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